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नया कलयुग आने को है

KUNAL KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नशामुक्त राज्य के नारे हैं,
        
                                                    
                            
पर गली-गली में नशे के मारे हैं।
अब शहर गांव में समानता है
सभी जगह ड्रग्स की समान उपलब्धता है।

जानवर और जंगल को बदनाम करके,
तिनका तिनका लूट लिया इंसानों ने।
जंगल और जानवर खा कर,
अब सड़कों पर इंसानी हैवान घूम रहे हैं।

कहीं लड़कियों का बीच सड़क चीर हरण,
तो कहीं लड़के का शिकार हो रहा है।
शिक्षक छात्रों का कर दे रहे बलात्कार
किंतु मूल समस्या को छोड़कर, पुरुषवाद पर विचार हो रहा हैं।

कोई मेरिट से मर रहा,
कोई जाति के नाम पर जान दे रहा।
कोई मज़हब का नारा लगाकर
समाज को काट रहा हैं
फिर ब्राह्मणवाद को गाली देकर
कालाधन को बांट रहा है।

चोर मंदिर को लूट रहे हैं
कुछ मज़हब के नाम पर बम बना रहे हैं
कुछ मानवतस्करी, तो कुछ धर्मान्तरण का रैकेट चल रहे हैं।
कुछ तो नए जमाने के नास्तिक है।
मांस, मंदिरा,मैथुन के लिए दुनिया में सतरंगी आग लगा रहे है।

काम, लोभ,मद, अहंकार भी डूबा हुआ इंसान,
देश और समाज के खातिर दूसरे को गरिया रहा है।
मौका मिलते ही सुई तक चुरा लेने वाले,
सतत विकास का कार्यक्रम चला रहे है।

अपनी ही ग़रीब जनता का हक मारकर, सामाजिक न्याय ला रहे हैं।
हजारों करोड़ का गबन करने वाले, पब्लिक पॉलिसी बना रहे हैं।

आम जनता सड़क पर हड़ताल करती रहे,
टैक्स और रिटर्न के कागज़ जमा करती रहे।
लेकिन लूट, हत्या और बलात्कार के आरोपी,
वातानुकूलित भवन से बहुमत की सरकार चला रहे हैं।

जिस दिन नशा उतरेगा इंसान का,
उस दिन पता चलेगा सिर्फ एक मोबाइल, पूरी पीढ़ी का दिमाग खा गया।
एआई और रोबोट ने इंसान को अपने जैसा बना दिया।
अब न चेतना बचा है, न चरित्र का नामोनिशान है।
रोगी , मनोरोगी इंसान का नया पहचान है।आत्मनिर्भर बनाने वाली अमृतकलश के तलाश में,
डिजिटल बंधुआ मजदूर की फौज आपस में लड़ मरी है।
परिवार टूट रहे हैं, रिश्ते छूट रहे हैं,
लोकतंत्र भीडतंत्र में बदल गया है।
स्वतंत्रता के नाम पर, स्वेच्छाचारिता का जमाना आ गया है।
शांति की समाप्ति को घोषणा होने को है,
बस अगले स्तर के प्रचंड कलयुग का भव्य स्वागत होने को है।
-कुणाल कुमार सिंह
 
एक महीने पहले
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