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तुम्हारी तरह छूट ना जाए

Kuldeep yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़ी शिद्दत से उठाते
        
                                                    
                            
हम जाम तुम्हारे शहर में
कहीं ये भी हमसे
तुम्हारी तरह छूट ना जाए
एक वर्ष पहले
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