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समय के साथ धूमिल होने लगीं

Kuldeep Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी तैयारी नहीं की,
        
                                                    
                            
दुःख सहने की,
समस्याएं झेलनी की,
अपनों से धोखा खाने की,
दर्द भरे आंसुओं को सहने की।
दरअसल तैयारी थी,
सुखद जीवन की,
सम्पन्न परिवार की,
हाई प्रोफाइल जीवन की,
वासनाओं को जीने की।
अचानक जीवन में,
कुछ ऐसा उल्टा- पुल्टा हुआ,
सब हउचपउच हो गया,
उम्मीद की किरण टूट गई,
परायों को छोड़ो,
अपनों ने भी टांगें खींचने में,
कसर नहीं छोड़ी,
ऐसा लगा जैसे,
सब बिखर रहा हो,
अचानक अजनबी लोगों ने,
मजबूत सहारा दिया,
जिन्दगी धीरे- धीरे,
सामान्य होकर संवरने लगी।
बीती हुई बातें,
मन-मस्तिष्क से,
समय के साथ धूमिल होने लगीं
- कुलदीप शुक्ला
3 महीने पहले
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