कैसे किसी क़ो उझाड़ कर ख़ुद क़ो सुखी कर लेते हैं
क्या ये लोग वहशी हैं जो ओरो क़ो दुखी कर लेते हैं
रूह पे ज़ख्म हज़ार हुए पऱ दवा ज़िस्म की दी गई
असर ऐसा हुआ दर्द ख़ुद क़ो और दुखी कर लेते हैं
इश्क़ रोग कमाल का इस पे कोई दवा दारू न लगे
बदीही हक़ीक़त क़ो भी हकीम अनसुनी कर लेते हैं
कोई तों कशिश होगी न मौत के फरिश्ते में आखिर
वरना युहीं नहीं लोग तड़पकर ख़ुदखुशी कर लेते हैं
जिंदगी ज़ीने की हर कोशिश ज़ब दम तोड़ दे कृष्णा
उम्मीद-ए-सहर भुला के लोग बस चुप्पी कर लेते है
-कृष्णा शर्मा