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.......मिथिलाक गौरव........

Komal Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जनक ज्ञान सँ उज्ज्वल धरती,
        
                                                    
                            
जानकीक पावन मान।
रामक मर्यादा सँ शोभित,
ई मिथिला भारतक शान।।

विद्यापतिक मधुर गीतावली,
आबो प्रेमक रस बरसाबै।
मैथिलीक मधुर स्वर सँ,
सभक हृदय अपन बनाबै।।

पाग हमर सम्मानक मुकुट,
मधुबनी हमर पहचान।
माछ, मखान, पानक सुगंधि,
बढ़बैत मिथिलाक मान।।

एहि माटिक कण-कण गाबै,
त्याग, प्रेम आ ज्ञानक गान।
जननी-जनमभूमिक माटी,
स्वर्ग सँ बेसी प्यार।।

ओकरा लेल जानो कुर्बान,
ई मिथिलावासी के संस्कार।
आब चलू फेर सँ प्रण करी,
मिथिलाक मान बढ़ाएब।।

जनक-जानकीक पावन आदर्श,
जीवनमे अपनाएब।
जय मिथिला,
जय मैथिलान।।
-कोमल
 
2 महीने पहले
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