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वह नारी है

Kiran Rana

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह डरती है, पर डराती नहीं ।
        
                                                    
                            
वह रोती है, पर रुलाती नहीं ।
वह संवारती है, पर बिगाड़ती नहीं ।
वह दयालु है, पर कमज़ोर नहीं ।
वह सबका दर्द सुनती है, पर अपना दर्द सुनाती नहीं।
वह सबका पेट भरती है, पर खुद भरपेट खाती नहीं ।
वह सबके मन को पढ़ती है, पर उसे कोई पढ़ पाता नहीं।
वह सबका रोष सहती है, पर क्रोध कभी बरसाती नहीं ।
वह स्त्री है
इसलिए नहीं कि वह सब सह लेती है, बल्कि इसलिए कि टूटकर भी अपनों के लिए मुस्कुराती रहती है
वह भी इंसान है, फिर भी हर बार सबसे पहले अपनों का सुख चुनती है।
क्योंकि वह एक स्त्री है...

- किरण राणा
2 महीने पहले
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