ऐसे ही ना जग में अब तक बनी हैं स्वर्णिम कहानियाँ
भारत माँ के सपूतों ने खपाई अपनी जवानियां
तब जाकर के मिली आजादी जिस पर हम इतरा रहे
आओ मिलकर इसे सम्भालें भारत की ये निशानियां
जाने कितने शहीद हुए जिनकी न कोई गाथा है
आगे पीछे कोई नहीं था पड़ी हुई हैं विरानियां
हुई मांओं की गोदी सूनी कई सुहागन बेवा हुईं
तब अंग्रेजी जंजीरों से मिली हमें आजादियां
अब फर्ज हमारा है इसकी प्राणों जैसी रक्षा करें
पंद्रह अगस्त के स्वागत में दिखाए नहीं नादानियां।
-किरण मिश्रा