आजकल जेन जी,जेन जी-
बहुत हो रहा है-
एकाएक ये पीढ़ी बहुत
तेजी से हाइलाइट हुई है
तो मैंने सोचा
कुछ इस पीढ़ी पर भी लिखा जाए -
जहाँ तक मैं इन्हें समझ सकी हूँ
बहुत मस्त मतवाले खूबसूरत
और मस्तमौला होते हैं
जेन जी वाले बच्चे
न किसी की परवाह ना संकोच
जो मन में है मष्तिष्क में है
वही उनके हावभाव और
रोजमर्रा में भी शामिल है
न ये पीढ़ी किसी से डरती है
और न किसी की सुनती है
अपने मर्जी के मालिक हैं ये
मुझे लगता है कुछ हद तक
ठीक भी तो है, हमने तो
सबका सुना घर- परिवार
और समाज के अनुसार चले
उन्हीं के अनुसार सारे काम किए
उसका नतीजा आज तक
अपने मन की बातें किसी के
सामने रखने की हिम्मत नहीं होती
किसी की गलतियों को
बताने में हमारी जान सूखती है
वहीं ये बच्चे जिससे मतलब नहीं
उसकी तरफ देखते भी नहीं
बिना मतलब किसी से बोलते नहीं
इनकी दुनिया अपने दोस्तों और
मोबाइल, इंटरनेट लैपटॉप तक
सीमित है, देश- दुनिया से कोई
मतलब नहीं, इनकी अपनी दुनिया
अपने एहसास और उन्हें समझने के
लिए भी ये स्वयं के दोस्तों से उम्मीद लगाते हैं
ज्यादातर माता-पिता एक जरिया हैं
आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए
तब तक जब ये अपने पैरों पर
खड़े नहीं हो जाते
इस पीढ़ी को अपनी जिंदगी में
बाप- बाप का हस्तक्षेप बिल्कुल
नहीं चाहिए,
एक यात्रा पर मेरे बगल की दो सीटों पर
इसी पीढ़ी के दो प्यारे बच्चे बैठे थे
अपनी मस्ती में हंसते-बोलते
निश्चिन्त बिल्कुल बेधड़क
मैं सोचती हूँ इतना कोंफिडेंस
हममें क्यों नहीं आया
आज तक दूसरों के सहारे का इंतजार
कहीं जाना हो किसी का साथ
कोई आवश्यकता हो दूसरों का
मुंह तको,मोबाइल में कुछ
समझना हो गूगल करना हो
या कोई ऐप से सम्बंधित
जानकारी चाहिए हो
सबका खजाना ये बच्चे हैं
सच में जेन जी तुम
बहुत प्यारे हो खुशगवार हो
हंसमुख और मस्तमौला हो।
-किरण मिश्रा