विज्ञापन

"मैंने सुना है"

Kayal Mehra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैंने सुना है
        
                                                    
                            
माँ को कहते हुए, की
लड़कियां अपने घर हाल समझती है
मैंने सुना है..
माँ को कहते हुए की
लड़कियां घर को संजो के चलती है
मैंने सुना है माँ को कहते हुए
जब मैं अपनी मर्जी से निकल जाऊ
घर से कहीं... की वो हो गई है अब
मेरे बस से बहार..
अब नहीं मेरा उसपे कोई अधिकार..
पर
मैंने कभी नहीं सुना उन्हें ये
कहते हुए.. की
लडके घर को संभाल कर रखते है
मैंने कभी नहीं सुना उन्हें
ये कहते हुए की..
लड़के अपनी इच्छाओ को मार के चलते है
मैंने कभी नहीं सुना उन्हें
ये कहते हुए की....
जो लड़कियों का पराया होता है
और लड़को का पीढ़ी दर पीढ़ी तक
अपना...।
वो उस घर के काम का जिम्मा अपने
सर रखते है...
मेंने कभी नहीं सुना..
माँ को ये कहते हुए.. की
लडके हर जगह उन्हें बताकर जाते है
मैंने कभी नहीं सुना उन्हें
ये कहते हुए की....
लडके भी समझौता करने के लिए बने होते है।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3562 कविताएं

View Profile