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बेटियां

Kavi Atul

Mere Alfaz
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                            कुदरत की रहमो इनायत होती हैं बेटियां।
        
                                                    
                            
खुदा की सच्ची इबादत होती हैं बेटियां।।
मां—बाप की आबरू गरूर हसरते और बंदिशें,
नाजुक कंधो पे क्या—क्या सहती हैं बेटियां।।
औरो की खुशी के लिये हर एक कुरबानी के बाद,
लिपटकर तकिये से छुप—छुप कर रोती हैं बेटियां।।
दो खानदानो में होती है इनसे रोशनी,
बेटो से फिर भी क्यों छोटी हैं बेटियां।।
इंसान की हैवानियत से देखो खुदा भी दंग है,
जब कोख में मां के वजूद खोती हैं बेटियां।।
जानता है हर कोई पर मानता नहीं कोई,
कि हीरा है गर बेटा तो मोती हैं बेटियां।।

अतुल जैन सुराणा
9755564255
9 वर्ष पहले
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