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मुझको सब संसार दिया

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्राण पिरोये, श्वास पिरोई, और स्वयं को वार दिया।
        
                                                    
                            
आज तुम्हारी एक झलक ने, मुझको सब संसार दिया।

जब से तुम इन नैन बसे हो,
सृष्टि नयी सी लगने लगी है।
जन्मों की सोयी सी तृष्णा,
मन के भीतर जगने लगी है।
प्रीत सँभाली, अश्क सँभाले, फिर अपना सब वार दिया।
आज तुम्हारी एक झलक ने, मुझको सब संसार दिया।

चाँद सितारे भी फीके हैं,
तेरे मुखड़े की आभा से।
मैं तो कबसे मन्त्रमुग्ध हूँ,
तेरी बाँकी इस शोभा से।
नैन निहारे, अधर निहारे, फिर पूरा शृंगार दिया।
आज तुम्हारी एक झलक ने, मुझको सब संसार दिया।

मैं तो केवल एक नदी हूँ,
तुम गहरे सागर का पानी।
तुझमें मिलकर पूर्ण हुई है,
मेरी आधी-अधूरी कहानी।
लहरें छोड़ीं, भँवर भी छोड़े, फिर ख़ुद को मँझधार दिया।
आज तुम्हारी एक झलक ने, मुझको सब संसार दिया।

कैसे मैं ऋण चुका सकूँगा,
तेरी इस निश्छल प्रीति का।
तुमने ही तो अर्थ बताया,
अनुरागों की हर नीति का।
सुध भी खोई, बुध भी खोई, फिर जीवन का सार दिया।
आज तुम्हारी एक झलक ने, मुझको सब संसार दिया।
-भानु शर्मा रंज
 
एक महीने पहले
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