विज्ञापन

कभी मौन में जब

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गीत
        
                                                    
                            

कभी मौन में जब सुनोगे हृदय को
तुम्हें याद आएँगे वादे सहारे
नदी चाहे जितनी दिशाएँ बदल ले
मिलन को तरसते हैं दोनों किनारे

कभी मौन में जब सुनोगे हृदय को
गगन के पटल पर सजेगी जो संध्या
तो स्मृति में जल उठेंगे दीप्त तारे
भले दूरियों के पहर लाख बीतें
मगर प्राण तुमको ही हर पल पुकारे

कभी मौन में जब सुनोगे हृदय को
भले ही अधर पर सजा लो तराने
छुपा कर नयन में जो हैं अश्क खारे
दिखावे की दुनिया से जिस दिन भी हारो
खुले ही मिलेंगे तुम्हें मन के द्वारे

कभी मौन में जब सुनोगे हृदय को
ये साँसों का गणित नहीं है प्रणय बस
तपस्या है युग की कई रूप धारे
तुम्हारी ही मूरत हृदय के शिवाले
मेरी वंदना नित्य तुमको सँवारे

कभी मौन में जब सुनोगे हृदय को
चलो छोड़ दें आज लहरों की ज़िद को
भँवर के ही सीने से कश्ती उबारे
समय के शिलालेख पर नाम लिख दें
जिसे काल का चक्र भी बस निहारे
कभी मौन में जब सुनोगे हृदय को
-भानु शर्मा रंज
 
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all