विज्ञापन

हियरो दीप बनै री

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐसी मीठी पीर जगावौ हियरो दीप बनै री
        
                                                    
                            
अंसुवन सों मैं मारग जोहूँ रैन दरस महँ सनै री

नैनन नीर बहै बन जमुना चरन कमल पखारै
बिन दरसन ही रोम रोम महँ छबि पीतम की निहारै
ऐसी सुध बुध हरौ बावरी अनहद बंसी सुनै री
ऐसी मीठी पीर जगावौ हियरो दीप बनै री

माटी मेरी उड़े पवन सँग कुंजन रज बन जावै
जहाँ धरौ तुम पगुवा अपुने भाल मोर तहँ पावै
विरह अगिनि में तपत तपत ही मिलन सुधा छलकै री
ऐसी मीठी पीर जगावौ हियरो दीप बनै री

कंटक चुभैं पाँव महँ मेरे पीर तोहे कसकावै
मेरी सिसकी सुनि सुनि कै पिय तोरा प्रान भरि आवै
दूरी तन की रहे बीच महँ मनुवाँ सँग ही गुनै री
ऐसी मीठी पीर जगावौ हियरो दीप बनै री

मैं पन मिटै रहै बस तू ही ऐसो नेह लगावो
रूँधे कंठ ते निकसै सरगम अपुनो गीत बनावो
रंज भान की अरज यही है स्वाँस स्वाँस महँ रमै री
ऐसी मीठी पीर जगावौ हियरो दीप बनै री
-भानु शर्मा रंज
 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all