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क्या लड़की होना आसान हैं?

Kashish Walia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या लड़की होना आसान हैं?
        
                                                    
                            
क्या लड़कियाँ आज भी आजाद हैं?
या आज भी पुरुष को ही सर्वोत्तम माना गया है?
क्या आज भी औरत एक मर्यादा की मूरत और समाज पर बोझ मानी जाती है?
या उसके भी अधिकार हैं, उसकी अपनी कोई स्वतंत्रता है?
क्या उसके भी सपनों और उसके अस्तित्व का मोल समझा गया है?

या आज भी उसे दुर्गा बनकर अपनी शक्ति का आभास कराना होगा,
क्या आज भी महाकाली बन उसे असुरों का वध करना होगा?
या सीता की तरह अग्निपरीक्षा देनी होगी?
या द्रौपदी की तरह अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए महाभारत छेड़नी होगी?

याद रहे,
नारी ही जन्मदाता है,
वही भाग्यविधाता है,
वह जननी है,
वह शक्ति है।
वह है तो सब है,
और वह नहीं तो कुछ भी नहीं।

नारी का धैर्य उसका शस्त्र है,
और कोमलता उसका श्रृंगार।
वह है तो सम्पूर्ण विश्व है,
और वह चाहे तो करे विनाश|

वह लक्ष्मी है, जिसके आगे विष्णु भी शीश झुकाते हैं।
वह राधा सी निर्मल है, जिसके लिए कृष्ण भी बंसी बजाते हैं।
वह सती है, जिसके प्रेम में शिव भी तांडव कर जाते हैं।

याद रहे, संयोग से तुम पुरुष हो
और सौभाग्य से मैं एक नारी|
ईश्वर करे हर पुरुष को नारी के जीवन को समझने का अवसर मिले,
ताकि वह भी उसकी तकलीफें समझे,
जाने उसके कष्ट, उसके आँसुओं में छिपी पीड़ा और संघर्ष।

फिर शायद नारी को स्वयं को सिद्ध करने की आवश्यकता न पड़े,
और एक दिन ऐसा आए,
जब उसे देवी नहीं,
केवल एक इंसान समझकर सम्मान दिया जाए।
एक महीने पहले
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