"मृत्यु"
संस्कार सब पाखण्ड है।
समाज तो मतांध है।
रीति - रिवाज़ रोग है।
स्वभाव ही धर्म है।।
मन्दिर - मस्जिद हद है।
पूजा - पाठ व्यंग्य है।
पंडित - मौलाना द्रव्य है।
बाकी सब भय है।
जानकर भी अज्ञ है।
राम नाम सत्य है।।