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मुमताज कलयुग की

Karan Bansiboreliya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कलयुग की मुमताज तैयार बैठी है,
        
                                                    
                            
रकीब से नैन लड़ाने को
मां का राज कुमार चल बैठा है,
प्यार का ताज बनाने को

प्यार, मोहब्बत, इश्क़, लगाव, रिश्ते,
मर्यादा की परिभाषा
रह गई दबकर पन्नों में,
जाए कौन रिपोर्ट लिखाने को

चली थी एक मुहिम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
क्या अभी भी आएगी कोई मुहिम बेटे बचाने को

विश्वगुरु बनने के पहले वाले दिन ही अच्छे थे
वो भी एक दौर था जब हम बच्चे थे
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, न कोई हिंदू खतरे में था
शब्द झूठे हमारे और रिश्ते सच्चे थे

घर की कई लाडली भरी पड़ी है सोशल मीडिया पर
करण अपना एक एक अंग दिखाने को..!

भीम, दिनकर, निराला, सूर, तुलसी, प्रेमचंद की
पंक्तियां तैयार खड़ी समाज को आईना दिखाने को
 
3 महीने पहले
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