विज्ञापन

1947 का भारत बनाने निकले हैं

Karan Bansiboreliya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अंधों को लाठी दिलाने निकले हैं
        
                                                    
                            
गूंगों की आवाज बनकर निकले हैं

सजी सवारी बैठी सरकार तवायफ के कोठे पर
सन 47 का हम भारत बनाने निकले हैं

कथा वाचक ध्यान भटकाते
समाचार भी है बिक जाते

कहीं भी हो कोई भी छल
आता न काम कोई भी दल

पेपर लीक के मुद्दे पर आवाज उठाने निकले हैं
सन 47 का हम भारत बनाने निकले हैं

मंदिरों की चंदा चोरी
सिस्टम में है घुस खोरी

सरकारी स्कूल की छत का गिरना
मासूम बच्चों का मिट्टी में मिलना

जंतर मंतर की नारे बाजी
चुनाव जीतने की आतिश बाजी

कभी अरावली पर्वत को बचाने निकले हैं
सन 47 का हम भारत बनाने निकले हैं

हर तरफ से महंगाई की मार
मणिपुर में मचा हा हा कार

प्रधान रहता भारत के बाहर
नो प्रेस कॉन्फ्रेंस, बस कर यार

वो देते जुमले एक जैसे हर बार
मंदिर बनाने की बाते लगातार

वो धरने पर अंधभक्तों को जगाने निकले है
सन 47 का हम भारत बनाने निकले हैं
 
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all