अंधों को लाठी दिलाने निकले हैं
गूंगों की आवाज बनकर निकले हैं
सजी सवारी बैठी सरकार तवायफ के कोठे पर
सन 47 का हम भारत बनाने निकले हैं
कथा वाचक ध्यान भटकाते
समाचार भी है बिक जाते
कहीं भी हो कोई भी छल
आता न काम कोई भी दल
पेपर लीक के मुद्दे पर आवाज उठाने निकले हैं
सन 47 का हम भारत बनाने निकले हैं
मंदिरों की चंदा चोरी
सिस्टम में है घुस खोरी
सरकारी स्कूल की छत का गिरना
मासूम बच्चों का मिट्टी में मिलना
जंतर मंतर की नारे बाजी
चुनाव जीतने की आतिश बाजी
कभी अरावली पर्वत को बचाने निकले हैं
सन 47 का हम भारत बनाने निकले हैं
हर तरफ से महंगाई की मार
मणिपुर में मचा हा हा कार
प्रधान रहता भारत के बाहर
नो प्रेस कॉन्फ्रेंस, बस कर यार
वो देते जुमले एक जैसे हर बार
मंदिर बनाने की बाते लगातार
वो धरने पर अंधभक्तों को जगाने निकले है
सन 47 का हम भारत बनाने निकले हैं