विज्ञापन

मारे जाओगे!

Kapil Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अगर तुम्हारे पास आत्मबोध नहीं है,
        
                                                    
                            
तो सच कहता हूँ—तुम मारे जाओगे!
मारे जाओगे अज्ञान से, अंधविश्वास से,
डर से और लालच से।

मारे वे भी जाएँगे,
जो सब जानने का स्वांग रचाते हैं;
मारे वे भी जाएँगे,
जिन्होंने उच्चतम को बाँटना नहीं सीखा।

मारे जाएँगे वे अपने ही धोखे से स्वयं भी!
अगर उच्चतम को समझा है, तो इसे आगे बढ़ाओ,
आगे बढ़ाओ सही संभावनाओं को।

जगह कितनी भी पवित्र हो,
अगर तुम अज्ञानी रहे, तो उसे भी अज्ञान से भर दोगे।
तुम अपनी सीमाओं को तोड़े बिना,
उसे भी किसी सीमा में बाँध दोगे!

बाँध दोगे उसे भी, जिसका निरंतर प्रवाह है,
बाँध दोगे उसे भी, जो अस्तित्व में गतिमान है।

ऐसे हो जाओ कि बाँधने का स्थान "समझ" ले तुम्हारी,
कुछ फिसलने से पहले समझ आए फिसलने का अस्तित्व!
~ यथार्थ
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pankaj Sharma

1228 कविताएं

View Profile