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आयुष्मान की कसौटी

Kanny T

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काग़ज़ पर सब एक समान,
        
                                                    
                            
हर जीवन का सम्मान लिखा।
पर सफेद गलियारों की धूप-छाँव में,
अक्सर बदला विधान दिखा।

सरकारी आँगन थककर भी,
अभावों से प्रतिदिन लड़े।
कॉरपोरेट के उजले कक्ष,
लाभ-हानि के बीच पड़े।

कहीं दवाओं की कमी मिली,
कहीं गणनाओं का भार।
बीच खड़ा था मौन मरीज़,
जीवन ही जिसका आधार।

योजना का अर्थ तभी बचे,
जब सेवा पहले, लाभ बाद।
जब हर निर्णय से पहले पूछा जाए,
क्या रोगी सचमुच है आबाद?

अस्पताल की पहचान,
न भवन, न पैकेज, न विज्ञापन हो।
सबसे बड़ी उपलब्धि केवल,
हर रोगी सुरक्षित जीवन हो।
- करुणा ताडेपल्ली
एक महीने पहले
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