:जब राहों में काँटे बिछ जाएँ, तुम फिर भी मुस्काना,
मुश्किल कितनी भी बड़ी हो, तुम आगे बढ़ती जाना ।
तुम बनना वो चमकता सूरज, जो अंधियारा हर लेता है,
अपने साहस की गर्मी से हर डर को पिघला देता है।
तुम बनना वो निर्मल गंगा, जो रुकना कभी न जाने,
पत्थरों से टकराकर भी अपनी मंज़िल को पहचानें।
तुम बनना मेहनत की भाषा, तुम बनना कर्म की वाणी,
तुमसे ही लिखी जाए आगे संघर्षों की कहानी।
जब थक जाएँ कुछ कदम किसी के, तुम हिम्मत बन जाना,
गिरते हुए मुसाफ़िर को फिर चलना सिखलाना।
न ताज तुम्हें विरासत दे, न कोई आसान राह मिले,
अपने परिश्रम की ज्योति से जीवन को नई चाह मिले।
तुम बनना वह दीप अकेला जो आँधी में जलता है,
दुनिया चाहे साथ न दे, फिर भी आगे बढ़ता है।
तुम बनना हर नारी की शक्ति, तुम बनना उसका अभिमान,
तुमसे ही ऊँचा उठेगा उसके सपनों का जहान।
जब इतिहास नए पन्नों पर अपना लेख सजाएगा,
तुम्हारा साहस हर बेटी को जीना सिखाएगा।
तुम बनना संघर्ष की गाथा, तुम बनना सफलता का मान,
तुम बनना हर लड़की की प्रेरणा, हर बेटी की पहचान।