जय माँ जगत जननी।
जय माँ गौरी तुम ही हो नारायणी।
कर तापस्या जब मूर्छित हुई माता,
शिव जी दौड़े आये।
डाल गंगाजल माता के ऊपर,
निर्मल तन है सजाये।
सुंदर काया के कारण माँ,
गौरी कहलायीं।
पिता हिमांचल व माता मैना के घर,
पुत्री रूप में आयीं।
कर विवाह शिव जी से,
माँ पार्वती बन आयीं।
पुत्र गणेश के अति मोह में माँ,
ममरतत्त्व बरसाने आयीं।
तुम ही हो धन की देवी माँ,
धन की रक्षा करती।
शक्ति, ऊर्जा, पोषण, सद्भाव, प्रेम, सौंदर्य से,
मैया हैं सबकी झोली भरती।
निर्मल मन से जो करे आराधना,
मैया दौड़ी - दौड़ी आती।
अपनी शीतल छाया से मैया,
सब मुश्किल से है बचाती।
जीवन भर करूँ मैं मैया,
तेरी ही भक्ति।
चरणों में रहे अब मेरा बसेरा,
इतनी दे दो माँ शक्ति।
-कंचन मिश्रा