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आशिक हूॅं

कमलेश कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आशिक हूॅं मगर दिल ये तलबगार नहीं है ।
        
                                                    
                            
कहता है कौन हमको अजी प्यार नहीं है ।

देखेंगे तुझे रोज फिर भी उफ़ न करेंगे ।
पाने को तुझे दिल अभी तैयार नहीं है ।

माना कि बहारों ने खूब हल्ला किया है ।
हमको अभी मरना अजी स्वीकार नहीं है।

तन्हा हैं "कमल" पंगा किसी से भी नहीं है ।
यह दिल का अजी इश्क़ है व्यापार नहीं है ।

 
2 महीने पहले
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