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इश्क़ की गलियाँ

Kamal singh dindor

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क़ की गलियाँ अब यहीं मोड़ते,
        
                                                    
                            
चल कमल, अब संघर्ष के मोड़ पे।
कुछ कहानियाँ यहीं मोड़ते,
अधूरे किस्से ख़्वाबों में देखते।
2 महीने पहले
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