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सवाल ज़रूरी है

kamal jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जवाब भले न मिले, 
        
                                                    
                            
पर सवाल ज़रूरी है।
जगे हम चाहे न रहें, 
पर एहसास ज़रूरी है।
लाभ भले ही न मिले, 
गलत का इंकार ज़रूरी है।
झूठ के इस बाज़ार में, 
सच का इज़हार ज़रूरी है।
भीड़ अगर ख़ामोश रहे, 
तो एक आवाज़ ज़रूरी है।अँधेरों से लड़ने के लिए, 
उम्मीद का आगाज़ ज़रूरी है।
राहें चाहे कितना कठिन हों, 
कदम पर विश्वास ज़रूरी है।गिरकर फिर से उठ जाना, 
जीने का अंदाज़ ज़रूरी है।
हर रिश्ता साथ निभाए, 
ये कहाँ मुमकिन होता है,
मगर रिश्तों में सच्चाई का, 
थोड़ा सा राज़ ज़रूरी है।
जीत मिले या हार मिले, 
कर्म का प्रयास ज़रूरी है।
ज़िंदगी बस साँसे नहीं, 
इसका एहसास ज़रूरी है।
—कमल किशोर झा 
3 महीने पहले
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