विज्ञापन

सपनों के आसमान में

kamal jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सपनों के आसमान में,
        
                                                    
                            
पंछियों-सी उड़ान हो,
नींद से ऐसे जागें हम,
पास अपनी मंज़िल तमाम हो।

आँखों में सुनहरी चाहत हो,
हृदय में विश्वास हो,
हर मुश्किल से आगे बढ़ने का,
जीतने का प्रयास हो।

राह भले ही कठिन मिले,
कदमों में फिर भी जान हो,
ठोकर खाकर उठते जाएँ,
हौसलों की पहचान हो।

बादल चाहे घिरते जाएँ,
मन में सूरज की शान हो,
अँधियारे के उस पार कहीं,
उम्मीदों का जहान हो।

सपनों को केवल देखें नहीं,
उन्हें सच करने का अरमान हो,
चाहे छोटी-सी ही सही,
हर सफलता का सम्मान हो।
-कमल किशोर झा
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile