चलो, एक किरदार बनाएँ,
वक़्त की आँच में इसे तपाएँ।
इसे थोड़ा उम्रदराज़ बनाएँ,
कुछ धूप, कुछ छाँव दिखाएँ।
थोड़ी ठोकरें इसे लगाएँ,
कुछ अपनों से चोट दिलाएँ।
सपनों की सीप तोड़कर,
इसे अनुभव के मोती दिलाएँ।
कभी हँसी के रंग सजाएँ,
कभी आँखों में नमी बसाएँ।
कभी जीत का स्वाद चखाएँ,
कभी हार से इसे मिलाएँ।
थोड़ा धैर्य, थोड़ी समझ दें,
थोड़ा मौन, थोड़ी अकड़ दें।
दर्द सहकर भी मुस्कुराए जो,
ऐसा मज़बूत हृदय गढ़ दें।
चलो, एक किरदार बनाएँ,
इसे जीवन का अर्थ सिखाएँ।
सिर्फ़ उम्र का बड़ा न हो यह,
इसे अनुभव से बड़ा बनाएँ।
— कमल किशोर झा