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आशियाने

kamal jha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दरिया का पानी तो उतर गया,
        
                                                    
                            
आँखों का पानी बरकरार है।
बह गए जो आशियाने हवाओं में,
उनका मलबा अब भी बेशुमार है।

दरिया उतर गया है मगर,
ज़िंदगी अब भी किनारे पर है।
इन आँखों की नज़र आज भी,
उन टूटे हुए वीराने पर है।
—कमल किशोर झा 
5 घंटे पहले
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Deepak Sharma

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