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पहले यौवन की पहली बारिश

Jyotibhusan Padhi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस सावन की पहली बूंद
        
                                                    
                            
जब मेरे बदन को छुई,
तो अंतरमन में यौवन का एहसास हुआ,
जैसे सोलह बरस ने
मेरी ज़िंदगी में दस्तक दी हो।

मेरे बिखरे केश
अब मुझे अच्छे लगने लगे हैं,
और पहली दफ़ा आईने के सामने
मुझे शर्म आने लगी है।

बारिश के स्पर्श से
यह धरती महक उठी है,
यह जहाँ खिल उठा है,
मगर इस सावन में
मेरे बदन की खुशबू फीकी क्यों है?
मेरा ये नादान मन बेचैन क्यों है?
मेरे अंतरमन को किसका इंतज़ार है?

शायद... ये अहसास
मेरे पहले यौवन की पहली बारिश का है!
हाँ..... ये अहसास
मेरे पहले यौवन की पहली बारिश का है |
- ज्योति
3 महीने पहले
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