आज तिजारत में नफा नहीं है
इस फितरत में वफ़ा नहीं है
तुम देखो मत जगह कहीं भी
इन शहरों में जफ़ा नहीं है
जाने कब से उदास हूँ पर
जाँ का वो फ़लसफ़ा नहीं है
जान लो आप आज से अभी से
हम पर कोई दफ़ा नहीं है
है सूरज वो घटा नहीं है
बादल गम का छटा नहीं है
आस पास है अभी हवा में
दिल से वो भी हटा नहीं है
है ये अब फैसला उसी का
करीब मेरे सटा नहीं है
आंखें ये भटकती हुई पर
नजरों से जो कटा नहीं है
कायम है हर दिले जवां में
पर मुझसे वो पटा नहीं है
-जयंत पटेल
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