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मेरी जुबानी

jayant patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क़ हमने कर लिया, अब है बतानी
        
                                                    
                            
आज फिर
दोस्ती तुमसे गवां के भी निभानी आज फिर

ज़िंदगी में जी लिया बचपन खुशी से और जो
खो गया है वो मुझे दे जा जवानी आज फिर

गूंजती जिनसे यहाँ हैं किलकारियां देख अब
मर रही है एक वो बेटी सयानी आज फिर

देखना है की कहाँ तक लोग बैठें हैं इधर
ज़ख्म में भी आंसू किसको है दिखानी आज फिर

रात हमने मयकदे में है गुज़ारी जो सभी
वो भुला दो शाम तो तय है सुहानी आज फिर

अब हमें गर यूं दबाकर मारने के भी लिए
इस ज़हर को चाहिए खूं में रवानी आज फिर

एक बेतरतीब सीधी जिंदगी के मोड़ पे
जी रहा हूं मैं भुला के सावधानी आज फिर

क्यों जुगनू को रोक पाओगे जहां में आप अब ?
आपको ये जो चमक भी है गिनानी आज फ़िर

हो सके तो आज 'जयंत' को भुला देना यहां
गर मिली ऐसी जवां दिल में जुबानी आज फिर।।

- जयंत पटेल

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