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दिल धड़कता जा रहा है

jayant patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क़रीबी का मकान पता जा रहा है
        
                                                    
                            
किया जो अब नसीब अता जा रहा है

इधर दिल मचलता जा रहा है
किसी की याद पलता जा रहा है

चला भी वो गया मेरा सनम जो
कहीं से फिर धड़कता जा रहा है

उसे यूं देख कर मैं खो गया
वहीं फिर दिल संभलता जा रहा है

यहीं पर पास बैठा था अभी
धीरे से अब सरकता जा रहा है

बुझा इक दीप देखा था कहीं
दुबारा वो दहकता जा रहा है

बदल कर अब जहां भर में सबा
ख़ुदा खुद भी बदलता जा रहा है

कली से फ़ूल निकली थी यहां
सुबह से घर महकता जा रहा है

निशां अबतक सरहदों पे है पड़ा
दिलों में तू झगड़ता जा रहा है

जुबां जब बात से भी है बड़ा
नज़र फिर क्यों बहकता जा रहा है

सितारा है धुंआ से ही घिरा
सिरा चंदा चमकता जा रहा है

जरा सा इक सुकूं के लिए
परिंदा भी चहकता जा रहा है

उसे पूरा भिगाया है कहीं
अना मेरा बरसता जा रहा है

खड़ा है जो करीब 'जयंत' भी
अभी तक से सहमता जा रहा है

- जयंत


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