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jayant patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख्वाब में तू जगाने आ रही है
        
                                                    
                            
रात ये फिरसे सुलाने आ रही है

रो लिए हम आज गम में, याद तेरी
आंसुओं को अब जमाने आ रही है

वो बकाया इश्क़ में रह जो गया था
आज उसको तू चुकाने आ रही है

है मिला तुझको किसी और से जो
ज़ख्म हमको क्यों दिखाने आ रही है

ले ख़बर अब तू हमारी भी चिल्ला के
कान में क्यों फुसफुसाने आ रही है

मैं रुका था चैन से,फिर वो वहीं पर
खून दरिया में बहाने आ रही है

दाग तो ज्यादा पड़े मेरे बदन में
नाज़ से तू क्यों नहाने आ रही है

माफ़ तो मैंने किया है ही नहीं फिर
क्यों अभी दिल में समाने आ रही है

खो दिया सबकुछ जमीं से आसमां तक
हक़ नहीं फिर भी जताने आ रही है

हँस लिया जो यूं 'जयंत' ने आज तो फिर
वो कहीं से मन जलाने आ रही है

- जयंत पटेल 

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