ग़मों की कमी खुशियो में बांटता होगा
मरा हुआ दिल रात भर जगता होगा
हसी आती है अब वक़्त के ताक़जो पर
जो भी देखता होगा खूब हसता होगा
दिल के चमन पे बहार आते आते
हर फूल मुर्झा चुका होगा
ना करे काम कोई ना कुछ काम आए
एक शराबि सब भूल चुका होगा
नूर तेरे ग़मों से उनको क्या मतलब
वो बस फन ऐ शायरी देखता होगा