. "ज़िंदगी का हुनर"
नेकियाँ करने की सोचो जब गुनाह के दिन जाएं,
समय रहते कर लो भलाई, कल का क्या भरोसा आए।
रोकर जियो तो सफर लंबा, हर पल भारी लगे,
हँसकर चलो तो पता भी न चले, कब जीवन पार लगे।
सबको सुख देना हाथ में हो, ये ज़रूरी तो नहीं,
पर किसी का दिल न दुखे, इतना तो कर ही सकते हैं हम।
चाह बढ़े तो शक्ति भी बढ़ती, मंज़िल पास आती है,
अभाव से लड़ जाना ही असली जीत कहलाती है।
अभाव को सर झुका कर मान लेना कायरपन है,
उससे जूझ कर निकलना ही असली जीवन है।
सिर्फ आसमान छू लेना कामयाबी नहीं कहलाए,
कामयाब वो है जो ऊँचा भी उड़े, पैर ज़मीन पर टिकाए।
इंतज़ार में बैठे रहोगे तो बचा-खुचा ही मिलेगा,
कोशिश करने वाले का छोड़ा हुआ ही सिला मिलेगा।
इसलिए उठो, चलो, अपने कर्म की राह बनाओ,
हँसते-हँसते जी लो, यही ज़िंदगी का हुनर अपनाओ।
- जगदीश प्रसाद शर्मा