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वक्त के साथ बदलना तो दुनिया की रीत है

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त के साथ बदलना तो दुनिया की रीत है,
        
                                                    
                            
मजा तो तब है जब वक्त बदले पर दिल में प्रीत है।

शब्द चाहे जितने तोल कर तुम बोलो,
लोग अपने मन के हिसाब से ही अर्थ निकालो।

बुरा व्यवहार मिले अगर उसे ठुकरा दोगे,
वो घृणा बनकर सीने में जहर भर जाएगा।
उसी को अगर तुम सहज स्वीकार करोगे,
वो क्षमा बनकर रिश्ते संवार जाएगा।

दूसरे की उन्नति देख जो जलते जाएं,
वो ईर्ष्या की आग में खुद को जलाते जाएं।
जिसने उसकी सफलता को प्रेरणा मान लिया,
वो हर दिन खुद से एक कदम आगे बढ़ गया।

जो तुमसे जलते हैं उनसे बैर न करना,
वो मान चुके हैं तुम उनसे बेहतर हो।
पीठ पीछे जो चर्चे करें समझ लेना,
तुम उनसे दो कदम आगे चल रहे हो।

कब समझौता करना, कब संघर्ष जरूरी है,
कब मौन रहना ही सबसे बड़ी रणनीति है।
जिसके पास विवेक का उजाला होता है,
वो जीवन के हर क्षेत्र में विजयी होता है।

विनम्रता की मिट्टी में सम्मान का अंकुर फूटता,
कमियां पहले खुद में ढूंढो यही दस्तूर होता।
आक्सीजन हो या विचार, स्तर गिरते ही खतरा,
जीवन का हर पन्ना कमजोर और कच्चा होता।

इसलिए उसूल मत बदलो, जड़ मत हिलाना,
वक्त बदले पर तुम वही अडिग रह जाना।
यही है जीने की सबसे बड़ी कला जग में,
यही है इंसान कहलाने का सच्चा ढंग जग में।

- जगदीश प्रसाद शर्मा
2 महीने पहले
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