जीवन की डोर में तीन धागे बंधे हैं,
दिल, दिमाग़ और तक़दीर संग चले हैं।
दिल देखता है हर पल बड़े सपने,
आँखों में उम्मीद के दीपक हैं अपने।
दिमाग़ बुनता है उन सपनों का रास्ता,
तर्क की सीढ़ी से चढ़ता है आस्था।
तक़दीर लिखती है कब क्या होगा,
किस रूप में मेहनत का फल मिलेगा।
तक़दीर सोने वालों से बात नहीं करती,
वो कर्म करने वालों का हाथ थामती है।
इच्छाओं में मत खोना, भ्रम में मत पड़ना,
योजनाओं के जाल में खुद को मत जकड़ना।
ईमानदारी साथ हो, धैर्य दीप जलाए,
निरंतर परिश्रम हर बाधा को मिटाए।
जो हाथ में है वो चुनो, वही करो,
सही निर्णय, श्रेष्ठ कर्म, सोच सकारात्मक रखो।
जो हाथ में नहीं उसे ईश्वर पर छोड़ दो,
व्यर्थ चिंता का बोझ मन से झटक दो।
जब दिल पवित्र हो, विवेक संग दिमाग़ हो,
और कर्म में सच्चाई का राग हो,
तब एक दिन तक़दीर भी मुस्कुराती है,
और मेहनत का मोल पहचान कर साथ निभाती है।
— जगदीश प्रसाद शर्मा