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ज़ख्म सबसे गहरे अपने ही दे जाते हैं

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मधुमक्खी शहद जोड़े, चींटी अनाज को,
        
                                                    
                            
इंसान धन जोड़े पर वो भी दूसरों के काम को।
इसलिए जोड़ो वही जो बाँटने के काम आए,
स्वार्थ की दीवार से रिश्ता कभी न टूट पाए।

ज़ख्म सबसे गहरे अपने ही दे जाते हैं,
सहे नहीं जाते और कहे भी नहीं जाते हैं।
पर रुक कर मत सोचना कौन कब बदल गया,
बस देखो वह तुम्हें क्या सिखा कर गया।

शब्द बोलने से पहले ज़रा खुद चख लेना,
अगर खुद को कड़वा लगे तो औरों को मत कहना।
जो गलत है उसे गलत कहना ही धर्म है,
चुप रह कायर बनने से बोलकर बुरा बनना कर्म है।

समय पर कर लो जो भी करना है जीवन में,
मौके कम आते हैं, अफसोस बहुत देती है ज़िन्दगी।
"मैं" की हवा जहाँ लगी, दवा-दुआ कुछ काम नहीं,
रिश्ते बचाने की जिद में अपनी कदर गंवाना नहीं।

अकड़ में जो रिश्ते तोड़े वो पछताते हैं,
और जो झुक कर रिश्ते बचाए वो सर उठाते हैं।
पिता की छाया हो तो हौसला बना रहता है,
इसलिए दुआ करो, सबके सिर पर साया बना रहे।

पड़ोसी क्या कहेगा ये सोच कर मत जीना,
अपनी राह खुद चुनो, अपना दीप खुद जलाना।
रिश्तों में तकरार बस "मैं सही" की जिद है,
जहाँ "हम" आ जाए वहाँ हर बात मंज़िल है।
- जगदीश प्रसाद शर्मा
2 महीने पहले
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