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पाप पुण्य, जीवन मरण, चरणों में लाया हूँ

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रभु तुमने हमें, प्रेम से रचाया है,
        
                                                    
                            
अपना आनंद ही, हममें बाँटने को बनाया है।

पूछूँ हे नाथ, इस तन का धर्म क्या है,
तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान ही तो सार है।

गृहस्थ के पथ पर, भूख प्यास भी आती है,
निंदा स्तुति, सुख दुःख, सब परीक्षा लाती है।

तप कर भी सत्पथ पर, चलने का बल दे दो,
संघर्षों में भी स्वाध्याय का, संबल दे दो।

वैदिक ऋचाओं का सार, श्वासों में भर दो,
हर कर्म को भजन, हर क्षण को जप कर दो।

तन मन धन मेरा, सब तुझको अर्पण है,
मान अपमान, जय पराजय, सब तेरा तर्पण है।

पाप पुण्य, जीवन मरण, चरणों में लाया हूँ,
बस तेरी कृपा का, आँचल माँगने आया हूँ।

 
एक महीने पहले
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