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सच्चा कवि

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सच्चा कवि वो ही कहाए, जिसके दिल में दर्द बसे,
        
                                                    
                            
दूसरे के आंसू देखे, तो शब्दों में रस घुल जाए।

गहन संवेदना का सागर, कल्पना की उड़ान रखे,
पत्ते के गिरने में भी वो, जीवन का गीत देखे।

प्रकृति का हर रंग-ढंग, उसकी आंखों में उतरे,
भोर की पहली किरण से, लेकर रात के तारे।

शब्दों का जादूगर वो, लय-छंद में बुनता है,
साधारण सी बातों को भी, गीतों में गूंथता है।

समाज का दर्पण बनकर, सच को सच कह जाता,
कुरीतियों पर चोट करे, नई राह दिखा जाता।

भीड़ से दूर, एकांत में, चिंतन की लौ जलाता,
मौन में डूब कर ही वो, ब्रह्म का भेद बताता।

पर सबसे बड़ी सच्चाई, सरस्वती का वरदान है,
जब तक माँ का आशीष है, तब तक कवि का मान है।

कवि न मनोरंजन का सौदागर, न बस तुकबंदी का ज्ञानी,
वो धरती का संवेदन है, वो समय की अमर वाणी।
- जगदीश प्रसाद शर्मा
3 महीने पहले
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