मेरा ख्याल है हमें बड़ों का ख्याल रखना चाहिए,
उनकी झुकी पीठ में अपना कल दिखाई देता है।
और यदि हम बड़े हैं तो छोटों को प्यार देना चाहिए,
उनकी आँखों में अपना भविष्य पलता रहता है।
रिश्ते-नाते समाज में शायद इसी काम आए,
कि हम एक-दूसरे का हाथ थाम कर चल पाए।
कोई कहता दुनिया स्वार्थ की, मतलब से बंधी है,
मतलब निकला तो लोग मुँह फेर लेते हैं।
पर मेरा ख्याल है, स्वार्थ से भी रिश्ते बनते हैं,
और उन्हीं में से कुछ ऐसे घने हो जाते हैं,
कि उनसे अलग होकर जीने की कल्पना भी नहीं होती,
वो साँसों में इस तरह बस जाते हैं।
ये स्वार्थ भी कितना सुंदर बंधन है न,
यही हमें आपस में जोड़कर रखता है।
यही नन्ही सी चाह हमें ईश्वर से भी जोड़ देती,
"तेरा ख्याल रखूँ" यही प्रार्थना बन जाता है।
ख्याल रखना मतलब बड़ा त्याग नहीं माँगता,
बस एक पूछ लेना, एक मुस्कान दे देना।
ख्याल रखना मतलब रिश्ते की मिट्टी सींचना,
जिससे प्रेम का पेड़ हरा-भरा रहता है।
इसलिए ख्याल रखिए, ख्याल रखवाइए मत,
देने में जो सुख है वो पाने में नहीं आता।
मेरा ख्याल है, यही सबसे बड़ा धर्म है,
और यही इंसान होने की सबसे सुंदर पहचान है।
- जगदीश प्रसाद शर्मा