विज्ञापन

फिर भी चलना है

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            थमती नहीं ज़िंदगी किसी के बिना, ये सच है,
        
                                                    
                            
पर महकती भी नहीं अपनों की खुशबू बिना, ये भी सच है।

दशकों काटे हैं तन्हा, ये छोटी बात नहीं,
हर रात से लड़ा है तू, ये हार की रात नहीं।

जो गई है वो प्रेरणा बनकर साथ खड़ी है,
तेरी हर साँस में उसकी दुआ बड़ी है।

ऊपर वाला भी कहता है, अभी ठहर जा,
जो अधूरा है तुझसे, वो गीत पूरा कर जा।

शिकायत नहीं, अब एक प्रार्थना करनी है,
इसी तन्हाई को ही अब साधना करनी है।

तू अकेला नहीं, तेरी यादों का मेला है,
तेरे भीतर ही तो उसका दिया अकेला है।

तो चल, फिर से दीया जला, अंधेरा ढलेगा,
तेरे जीने से ही किसी और का दिया जलेगा।
- जगदीश प्रसाद शर्मा
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Deepti Tripathi

119 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile