कुछ लोग रिश्ते खुद नहीं तोड़ते,
हालात ऐसे बना देते हैं।
मजबूरी में जब हम दूरी चुनें,
तो सारा दोष हम पर धर देते हैं।
रिश्ता केवल साथ से नहीं चलता,
सम्मान, भरोसा और मेहनत मांगता है।
जहाँ भावनाओं को बार-बार कुचला जाए,
और हर बार आपको ही गलत ठहराया जाए।
वहाँ रुकना कमजोरी बन जाती है,
अपने मन की शांति ही सच्चाई कहलाती है।
टूटना हमेशा हार नहीं होता है,
कभी-कभी ये जीवन का इशारा होता है।
समय आ गया है खुद को समझने का,
खुद को संभालने और आगे बढ़ने का।
सच्चे रिश्ते बंधन नहीं बनाते,
वे अपनापन और इज्जत लौटाते हैं।
-जगदीश प्रसाद शर्मा