रजस्वला हुई नारी, तो अपवित्र क्यों?
जिसने सृष्टि को जन्म दिया, वह पतित क्यों?
न पूजा का आग्रह, न कर्मकांड का भार,
प्रकृति का वरदान है, तो ये वर्जित क्यों?
-जगदीश चंद्र कापड़ी