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इंसान जिन्दा है

Jagdish chandra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नई सोच है, तो विज्ञान जिंदा है।
        
                                                    
                            
जमीर बिका तो शैतान जिंदा है।

कौन यह अफवाह फैला रहा?
कि अभी तक इंसान जिंदा है।

माँ की दुआओं से आज भी।
इस धरा में ईमान जिंदा है।

भूख से लड़ते होंठों पर,
धैर्य का सम्मान जिंदा है।

सच के खातिर झुकता नहीं,
सड़क में नंगा इंसान जिंदा है।

हर चीख के पीछे दबा हुआ,
जीने को एक अरमान जिंदा है।

अगर किसी के दर्द से दिल धड़के।
समझो, अभी तक इंसान जिंदा है।
.... जगदीश चंद्र कापड़ी
2 महीने पहले
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