हम वतन के प्रहरी हैं, हम इसके रखवाले हैं,
नहीं घबराते संकट से, ऐसे निडर मतवाले हैं।
मेरा वतन है सबसे सुंदर, मेरा वतन महान है,
विश्व में देखो इसकी तो, अलग ही पहचान है।
वतन के लिए जीना है, वतन के लिए मरना है,
जान हथेली पर लेकर, हमें राह पर चलना है।
एक गोली, एक दुश्मन, यही लक्ष्य हमारा है,
न झुका है न झुकने देंगे, अपना तिरंगा प्यारा है।
कश्मीर मुकुट है भारत का, इसे नहीं खोने देंगे,
अपने से अलग कभी इसको, हम नहीं होने देंगे।
अमन-चैन हो बस वतन में, यही सपने सजोते हैं,
जिये देश शान से अपना, यही दुआ हम करते हैं।
हिम से ढकी पहाड़ियों में भी, हम पहरा देते हैं,
आंधी-तूफान हो चाहे, हम कभी न घबराते हैं।
अपने वतन की माटी का, तिलक हम लगाएंगे,
भारत मां की जय बोलकर, आगे बढ़ते जाएंगे।
वतन पे कुर्बान हुए जो, उन वीरों को याद करें,
उनके इस बलिदान को हम, दिल से सलाम करें।
तिरंगा अपनी आन-बान है, तिरंगा अपनी शान है,
सारे जहां में यही तो बस, अपनी एक पहचान है।
- जगदीश भंडारी