विज्ञापन

दुखियारा कुत्ता

Islam Ali

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं हूँ एक दुखियारा कुत्ता।
        
                                                    
                            
मुसीबतों का मारा कुत्ता।।

कोई मुझे करता है प्यार।
कोई करता है अत्याचार।।

मुझे इंसान से है बड़ा लगाव।
नहीं चाहिए इनसे अलगाव।।

कोई तो बताए, कहाँ है मेरा ठिकाना?
तुम मुझे दे दो, बचा-खुचा ही खाना।।

ठंडी रात में जब ढूँढता हूँ रैन बसेरा।
ढूँढते ढूँढते हो जाता है सवेरा।।

सूरज उगते ही,यदि कहीं डालूँ पड़ाव।
हर कोई कहता है, इस कुत्ते को भगाओ।।

मैं मुफ़्त में करता हूँ पहरेदारी।
फिर भी नहीं मिलती वफ़ादारी।।

कोई तो मेरा रखो ध्यान।
मुझमें भी है नन्ही सी जान।

इस्लाम अली
हरिद्वार, उत्तराखण्ड
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

183 कविताएं

View Profile