विज्ञापन

चिड़िया की ममता

Islam Ali

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उस जर्जर मुंडेर पर
        
                                                    
                            
एक नन्ही-सी स्पैरो
चोंच में दाना थामे
उड़ी नहीं — ठहरी रही
बच्चों की भूख से ज़्यादा
कुछ भी नहीं उसके पंखों में।

वो गीत नहीं गा रही थी आज
ना कलरव था, ना उछाह
सिर्फ़ थी एक बेचैनी, एक तड़प
बच्चों की टिमटिमाती आँखों में
आस की जोत रखनी थी।

हर बार उड़ती
छोटे से आकाश को नापती
और लौटती
बस उसी मुंडेर पर,
जहाँ उसके बच्चों का संसार है।

उसका पेट खाली रहा
पर चोंच कभी ख़ाली न लौटी।
कभी कोई पेड़ न किया उसने अपना
मगर हर तिनके को
बच्चों के घोंसले के वास्ते चुराया।

पंखों में थकान थी
पर ममता में नहीं।
एक चिड़िया की उड़ान
सिर्फ़ आकाश न नापती —
वो एक दुनिया को पालती है।
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4212 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7122 कविताएं

View Profile

G S

6 कविताएं

View Profile