विज्ञापन

मजलूमों कों कभी तुम सताना नहीं

irfan saeed writer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम रहे ना रहे तुम भी रोना नहीं
        
                                                    
                            
पलके अपनी कभी भी भिगोना नहीं

तुम समझते हो कि रेज़ा हो जायेगा
आख़िर दिल है मेरा ये खिलौना नहीं

अजी होते है दीवार के कान भी
राज दिल मे रखो तुम बताना नहीं

कोई हिन्दू नहीं कोई मुस्लिम नहीं
पहले इंसा बनो तुम यू लड़ना नहीं

हाय लगती है तुम राख़ हो जाओगे
मजलूमों कों कभी तुम सताना नहीं
28 मिनट पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

1 कविता

View Profile

Deepak Sharma

24 कविताएं

View Profile