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दफ़ना मुझे जिन्दा मेरी धड़कन नहीं देखी

irfan saeed writer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल मे दर्द चेहरे पे शिकन नहीं देखी
        
                                                    
                            
माथे पे लकीरों की सुकड़न नहीं देखी

कैसा अजीब वास्ता था इश्क़ से पड़ा
इश्क़ ने नफरतों की उलझन नहीं देखी

तुम आज सो रहो गैरों की बांहों मे
तुमने कभी यार मेंरी तड़पन नहीं देखी

ऐ गैर के कहने पर मुझे क़त्ल करने वाले
दफ़ना मुझे जिन्दा मेरी धड़कन नहीं देखी
एक महीने पहले
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