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बस अपने प्यार का पैग़ाम दिया है मैंने।

Iqbal mehdi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बस अपने प्यार का पैग़ाम है दिया मैंने।
        
                                                    
                            
मचल कर तुझको गले से लगा लिया मैंने।।

जब तेरा चांद सा चेहरा था मेरे हाथों में।
उससे बेहतर कोई लम्हा नहीं जिया मैंने।।

मुझ पर बेसाख्ता मदहोशिया सवार हुई।
गुलाबी फूल से होठों को जब छुआ मैंने।।

लबों से तेरे लबों का मैं जाम पी लेता ।
मग़र अफसोस कि ऐसा नहीं किया मैंने।।

क्या तुम भी अपने इस"मेंहदी"के साथ बहकोगी।
तुम्हें ये फैसला लेने का हक़ दिया मैंने।।
-इक़बाल मेंहदी काजमी
एक घंटा पहले
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Sanjai kumar

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